तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ٱلْأَعْرَابُ أَشَدُّ كُفْرًا وَنِفَاقًا وَأَجْدَرُ أَلَّا يَعْلَمُوا۟ حُدُودَ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ﴿٩٧﴾
देहात के रहने वाले यदि अविश्वास या पाखंड के मार्ग पर चल पड़ें, तो उनका कुफ्र अन्य शहरी क्षेत्र के लोगों के कुफ़्र से अधिक गंभीर और उनका पाखंड उन लोगों की तुलना में अधिक सख़्त होगा। तथा ये लोग इस बात के अधिक योग्य हैं कि धर्म से अनभिज्ञ हों और इनके बारे में इस बात की अधिक संभावना है कि धार्मिक कर्तव्यों, सुन्नतों तथा उन आदेशों के नियमों को न जानें, जिन्हें अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारा है। क्योंकि वे उजड्डपन, अक्खड़पन और लोगों के साथ मेल-मिलाप और संपर्क के अभाव से पीड़ित हैं। अल्लाह उनकी स्थितियों को जानने वाला है। उनकी कोई बात उससे छिपी नहीं है। वह अपने प्रबंधन और अपने विधान में हिकमत वाला है।