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البلدआयत 17

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ ﴿١٧﴾

फिर वह उन लोगों में से हो, जो अल्लाह पर ईमान लाए और एक-दूसरे को नेक कामों पर डटे रहने, गुनाहों से दूर रहने और मुसीबत के समय धैर्य रखने की सलाह दी, तथा एक-दूसरे को अल्लाह के बंदों पर दया करने की सलाह दी।