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القدرआयत 5

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ ﴿٥﴾

यह बरकत वाली रात उसके शुरू होने से लेकर फ़ज्र के उदय होने पर उसके अंत तक सर्वथा भलाई ही भलाई है।