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الزلزلة
आयत 3
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا لَهَا ﴿٣﴾
और इनसान हैरान होकर कहेगा : क्या बात है कि धरती हिल रही है और काँप रही है?!
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