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يونسआयत 105

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَأَنْ أَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمُشْرِكِينَ ﴿١٠٥﴾

तथा उसने मुझे यह भी आदेश दिया है कि मैं सत्य धर्म पर स्थापित रहूँ और सभी धर्मों से विमुख होकर उसी पर स्थिर रहूँ, और मुझे इस बात से मना किया है कि मैं उसके साथ शिर्क करने वालों में से होऊँ।