तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَٱنْحَرْ ﴿٢﴾
अतः आप इस नेमत पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए केवल उसी के लिए नमाज़ पढ़ें और क़ुर्बानी करें; मुश्रिकों के प्रचलन के विपरीत जो अपनी मूर्तियों की निकटता प्राप्त करने के लिए बलि देते हैं।
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَٱنْحَرْ ﴿٢﴾