तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قُل لَّوْ أَنتُمْ تَمْلِكُونَ خَزَآئِنَ رَحْمَةِ رَبِّىٓ إِذًا لَّأَمْسَكْتُمْ خَشْيَةَ ٱلْإِنفَاقِ ۚ وَكَانَ ٱلْإِنسَـٰنُ قَتُورًا ﴿١٠٠﴾
(ऐ रसूल!) आप इन बहुदेववादियों से कह दीजिए : यदि तुम लोग मेरे पालनहार की दया के खज़ानों के मालिक होते, जो न घटते हैं और न समाप्त होते हैं, तो उस समय तुम उनके समाप्त होने के डर से उन्हें खर्च करने से रुक जाते ताकि तुम ग़रीब न हो जाओ। और यह मनुष्य के स्वभाव ही में है कि वह कंजूस (कृपण) है, परंतु यदि वह मोमिन है, तो अल्लाह के सवाब (पुण्य) की आशा में खर्च करता है।