तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَمْ تَقُولُونَ إِنَّ إِبْرَٰهِـۧمَ وَإِسْمَـٰعِيلَ وَإِسْحَـٰقَ وَيَعْقُوبَ وَٱلْأَسْبَاطَ كَانُوا۟ هُودًا أَوْ نَصَـٰرَىٰ ۗ قُلْ ءَأَنتُمْ أَعْلَمُ أَمِ ٱللَّهُ ۗ وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَتَمَ شَهَـٰدَةً عِندَهُۥ مِنَ ٱللَّهِ ۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَـٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ ﴿١٤٠﴾
(ऐ अह्ले किताब!) क्या तुम कहते हो : इबराहीम और इसमाईल और इसह़ाक़ और याक़ूब तथा याक़ूब की संतान में से होने वाले पैग़ंबर, यहूदी या ईसाई धर्म के अनुयायी थे? ऐ नबी! आप उनका उत्तर देते हुए कह दें : क्या तुम अधिक जानते हो या अल्लाह?! यदि उनका दावा है कि वे (उक्त नबीगण) उनके धर्म पर थे, तो निश्चय उन्होंने झूठ बोला है। क्योंकि उनकी नुबुव्वत और मृत्यु का ज़माना तौरात और इंजील उतरने से पहले का है! इससे यह पता चला कि जो कुछ वे कहते हैं, वह अल्लाह और उसके रसूलों के खिलाफ झूठ है, और उन्होंने उस सत्य को छिपाया है, जो उनपर उतरा था। और उससे बड़ा ज़ालिम कोई नहीं, जो अपने पास मौजूद उस पक्की गवाही को छिपाए, जिसका ज्ञान उसे अल्लाह की ओर से हुआ है, जैसा कि किताब वालों ने किया। और अल्लाह तुम्हारे कर्मों से अनजान नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।