तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَا تَجْعَلُوا۟ ٱللَّهَ عُرْضَةً لِّأَيْمَـٰنِكُمْ أَن تَبَرُّوا۟ وَتَتَّقُوا۟ وَتُصْلِحُوا۟ بَيْنَ ٱلنَّاسِ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ﴿٢٢٤﴾
अल्लाह की क़सम को नेकी करने, परहेज़गारी तथा लोगों के बीच मेल-मिलाप कराने के विरुद्ध तर्क मत बनाओ। बल्कि अगर तुम भलाई न करने की क़सम खा लो; तो भलाई का कार्य करो और अपनी क़समों का कफ़्फ़ारा अदा कर दो। तथा अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे कार्यों को जानने वाला है, और वह तुम्हें उनका बदला देगा।