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الأنبياءआयत 102

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لَا يَسْمَعُونَ حَسِيسَهَا ۖ وَهُمْ فِى مَا ٱشْتَهَتْ أَنفُسُهُمْ خَـٰلِدُونَ ﴿١٠٢﴾

उनके कानों तक जहन्नम की आवाज़ नहीं पहुँचेगी और वे अपनी मनपसंद नेमतों और सुख-सुविधाओं में हमेशा रहने वाले होंगे। उनकी नेमतें कभी खत्म नहीं होंगी।