तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَلَمْ تَرَ إِلَىٰ رَبِّكَ كَيْفَ مَدَّ ٱلظِّلَّ وَلَوْ شَآءَ لَجَعَلَهُۥ سَاكِنًا ثُمَّ جَعَلْنَا ٱلشَّمْسَ عَلَيْهِ دَلِيلًا ﴿٤٥﴾
क्या (ऐ रसूल!) क्या आपने अल्लाह की रचना की निशानियों को नहीं देखा, जब उसने धरती के चेहरे पर छाया फैला दी। यदि वह चाहता कि उसे स्थिर कर दे और वह न हिले, तो निश्चय वह उसे ऐसा ही बनाता। फिर हमने सूर्य को उसका संकेत देने वाला बना दिया, जिसके साथ वह लंबा और छोटा होता है।