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الفرقان
आयत 46
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ثُمَّ قَبَضْنَـٰهُ إِلَيْنَا قَبْضًا يَسِيرًا ﴿٤٦﴾
फिर जैसे-जैसे सूरज बुलंद होता है, हम छाया को धीरे-धीरे कम करते हुए समेट लेते हैं।
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