तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَكَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍۭ بَطِرَتْ مَعِيشَتَهَا ۖ فَتِلْكَ مَسَـٰكِنُهُمْ لَمْ تُسْكَن مِّنۢ بَعْدِهِمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ وَكُنَّا نَحْنُ ٱلْوَٰرِثِينَ ﴿٥٨﴾
कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्होंने अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों का इनकार किया और पापों तथा अवज्ञा में हद से बढ़ गईं। तो हमने उनपर एक अज़ाब भेजकर उसके साथ उन्हें नष्ट कर दिया। तो ये उनके घर उजड़े पड़े हैं, जहाँ से लोग गुज़रते हैं, परंतु कुछ राहगीरों को छोड़कर यहाँ उनके बाद कोई निवास नहीं किया। और अंततः हम ही वारिस हैं, जो आसमानों और ज़मीन के और उनमें रहने वालों के वारिस होते हैं।