तफ़सीर अल-मुख़्तसर
مَن كَانَ يُرِيدُ حَرْثَ ٱلْـَٔاخِرَةِ نَزِدْ لَهُۥ فِى حَرْثِهِۦ ۖ وَمَن كَانَ يُرِيدُ حَرْثَ ٱلدُّنْيَا نُؤْتِهِۦ مِنْهَا وَمَا لَهُۥ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ مِن نَّصِيبٍ ﴿٢٠﴾
जो कोई आख़िरत का प्रतिफल चाहता है और उसके लिए उसका कार्य करता है, हम उसके लिए उसके प्रतिफल को कई गुना बढ़ा देते हैं, क्योंकि नेकी का बदला दस गुना से सात सौ गुना तक, बल्कि उससे भी अधिक गुना तक मिलता है। तथा जो केवल दुनिया चाहता है, हम उसे दुनिया में उसका नियत भाग प्रदान कर देते हैं और उसके दुनिया को (आख़िरत पर) तरजीह देने के कारण उसके लिए आख़िरत में कोई भाग नहीं है।