तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَسْمَعُ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ ﴿٨﴾
यह काफ़िर क़ुरआन में अल्लाह की उन आयतों को सुनता है, जो उसके सामने पढ़ी जाती हैं, फिर वह अपने अभिमान के कारण सत्य का पालन करने से उपेक्षा करते हुए, अपने कुफ़्र और पाप की गतिविधि को जारी रखता है। मानो कि उसने उन आयतों को सुना ही नहीं, जो उसके सामने पढ़ी जाती हैं। तो (ऐ रसूल!) आप उसे आख़िरत में एक बुरी चीज़ की सूचना दे दीजिए और वह एक दर्दनाक यातना है जो उसका इंतज़ार कर रही है।