तफ़सीर अल-मुख़्तसर
تَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يَتَوَلَّوْنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۚ لَبِئْسَ مَا قَدَّمَتْ لَهُمْ أَنفُسُهُمْ أَن سَخِطَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ وَفِى ٱلْعَذَابِ هُمْ خَـٰلِدُونَ ﴿٨٠﴾
(ऐ रसूल!) इन यहूदियों में से बहुत-से काफ़िरों को आप देखेंगे कि वे काफ़िरों से प्रेम करते हैं तथा उनकी ओर झुकाव रखते हैं, जबकि वे आपके प्रति शत्रुतापूर्ण हैं और एकेश्वरवादियों से शत्रुता रखते हैं। उनका काफ़िरों से दोस्ती रखने का यह कार्य बहुत बुरा है। क्योंकि यह अल्लाह के उनपर क्रोधित होने और उन्हें नरक की आग में डालने का कारण है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, वहाँ से वे कभी न निकलेंगे।