तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَوْ كَانُوا۟ يُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلنَّبِىِّ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِ مَا ٱتَّخَذُوهُمْ أَوْلِيَآءَ وَلَـٰكِنَّ كَثِيرًا مِّنْهُمْ فَـٰسِقُونَ ﴿٨١﴾
यदि ये यहूदी वास्तव में अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान रखते होते, तो बहुदेववादियों को मित्र न बनाते कि मोमिनों को छोड़कर उनसे प्यार करते और उनकी ओर झुकाव रखते। क्योंकि उन्हें काफ़िरों को दोस्त बनाने से मना किया गया था। लेकिन इन यहूदियों में से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी संरक्षकता तथा मोमिनों की संरक्षकता से बाहर हैं।