×
الطور
आयत 2
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَكِتَـٰبٍ مَّسْطُورٍ ﴿٢﴾
और उस किताब की क़सम खाई है, जो लिखी हुई है।
पिछली आयत
अगली आयत