तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا۟ فِى ٱلْمَجَـٰلِسِ فَٱفْسَحُوا۟ يَفْسَحِ ٱللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ ٱنشُزُوا۟ فَٱنشُزُوا۟ يَرْفَعِ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنكُمْ وَٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْعِلْمَ دَرَجَـٰتٍ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ﴿١١﴾
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों (बैठकों) में जगह कुशादा कर दो, तो उनमें जगह बना दिया करो। अल्लाह तुम्हारे सांसारिक जीवन तथा आख़िरत में तुम्हारे लिए विस्तार पैदा करेगा। और जब तुमसे कहा जाए : कुछ मजलिसों से उठ जाओ, ताकि वहाँ प्रतिष्ठित लोग बैठ सकें, तो वहाँ से उठ जाया करो। अल्लाह तुममें से उन लोगों के दर्जों (पदों) को बहुत ऊँचा करेगा, जो ईमान लाए और जो ज्ञान दिए गए। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी छिपा नहीं है। और वह तुम्हें उनका बदला देगा।