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الفجر
आयत 2
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَيَالٍ عَشْرٍ ﴿٢﴾
और ज़ुल-हिज्जा के महीने की प्रथम दस रातों की क़सम खाई है।
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