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الفجر
आयत 4
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ ﴿٤﴾
और रात की क़सम खाई है, जब वह आए, चले और प्रस्थान करे। इन क़समों का जवाब यह है कि : तुम अपने कर्मों का अवश्य बदला दिए जाओगे।
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