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الشمس
आयत 6
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا ﴿٦﴾
और धरती की क़सम खाई है तथा उसके बिछाने व हमवार करने की क़सम खाई, ताकि लोग उसके ऊपर रह सकें।
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