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الشمسआयत 5

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا ﴿٥﴾

और आकाश की क़सम खाई है तथा उसके मज़बूत निर्माण की क़सम खाई है।